NEWS :-दिल्ली मे महिला ​पत्रकारों पर पुलिसिया बर्बरता लोकतंत्र और संविधान पर हमला- अफरोज खान

NEWS :-दिल्ली मे महिला ​पत्रकारों पर पुलिसिया बर्बरता लोकतंत्र और संविधान पर हमला- अफरोज खान



​भटगांव / सूरजपुर - देश की राजधानी में '4 पी एम ' न्यूज चैनल की दो महिला पत्रकारों शाहीन खान और उसकी सहयोगी नफीसा खान के साथ दिल्ली पुलिस द्वारा की गई बर्बरता और अमानवीय व्यवहार पर छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (अल्पसंख्यक विभाग) के प्रदेश महासचिव अफरोज खान ने कड़ा विरोध किया है। उन्होंने इस घटना को लोकतंत्र और देश के चौथे स्तंभ पर सीधा हमला और संविधान की धज्जियां उड़ाने वाला कृत्य करार दिया।उन्होंने मांग की कि इस घिनौने कृत्य में शामिल दोषी पुलिसकर्मियों को तत्काल बर्खास्त कर उन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

​अफरोज खान ने कहा कि पुलिस का काम नागरिकों की सुरक्षा करना है, न कि सत्ता के इशारे पर निरपराधों और पत्रकारों पर अत्याचार करना। एक कार्यक्रम का कवरेज करने गईं 4 पी एम की दोनों महिला पत्रकार को पहले पकड़ कर थाने ले गईं और फिर थाने के भीतर उन दोनों महिला पत्रकारों शाहीन खान और नफीसा खान को बंधक बनाकर पीटना न सिर्फ पुलिस महकमे के लिए शर्मनाक है, बल्कि यह कानून के राज का खुला उल्लंघन है।

​'नाम और धर्म पूछकर की गई पिटाई'

अफरोज खान ने कहा की ​घटना का सबसे गंभीर पहलु ये है की "पीड़ित पत्रकार शाहीन खान द्वारा लगाए गए आरोप बेहद डराने वाला और भयावह हैं। शाहीन खान ने आरोप लगाया कि जब पुलिस अधिकारियों को पता चला कि पीड़ित का नाम 'खान' है, तो उनके साथ यह कहकर और अधिक बर्बरता की गई कि 'अच्छा, तुम मुसलमान हो... तुम्हें तो और मारना पड़ेगा!' यह बयान साबित करता है कि कानून के रखवालों के दिमाग में किस कदर सांप्रदायिक जहर भरा जा चुका है।"
​अफरोज खान ने दिल्ली पुलिस से तीखे सवाल किए की मुस्लिम पीड़ित ​न्याय की आस अब कहां जायँ किससे गुहार लगाए ? मुस्लिमों के साथ सड़क पर भीड़ द्वारा हिंसा की खबरें लगातार सामने आ रही थी, अब थानों के भीतर पुलिस खुद धर्म देखकर लोगों को निशाना बनाएगी, तो देश का अल्पसंख्यक,आदिवासी,दलित और आम नागरिक इंसाफ की गुहार लेकर कहां जाएगा?

अफरोज खान ने आगे कहा की ये ​लोकतंत्र का हनन है,यदि निष्पक्ष पत्रकारिता करने वाली महिलाओं को उनके नाम और धर्म के आधार पर निशाना बनाया जाएगा, तो देश में अभिव्यक्ति की आजादी का क्या वजूद रह जाएगा?

​संविधान विरोधी मानसिकता पर जल्द रोक लगना चाहिए। दिल्ली पुलिस को अपनी साख बचाने के लिए तुरंत धर्मनिरपेक्ष और निष्पक्ष रवैया अपनाना होगा। अगर कानून प्रवर्तन एजेंसियां जाति और धर्म के चश्मे से न्याय करने लगेंगी, तो यह देश के लोकतांत्रिक ढांचे को पूरी तरह तबाह कर देगा। उन्होंने मांग की कि इस घिनौने कृत्य में शामिल दोषी पुलिसकर्मियों को तत्काल बर्खास्त कर उन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

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